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Monday, 1 September 2014

Theek Chunav Se Pahle(Hindi)


Elections are always a time for every Indian to have some thought provoking engagements of biased discussions with friends, family and most importantly oneself. Just before the recent elections (16th Lok Sabha) there were certain sops declared by the then incumbent government and there were attacks - counter attacks on these steps ...... My peak at the situation and my feelings on the outcome of the elections...... ( this was written just before the elections)

   ठीक चुनाव से पहले

इस देश का अब इतना अज़ीब-ओ-गरीब हाल हो गया है,
सूखी रोटी के साथ प्याज़ खाना भी मुहाल हो गया है.
सरकार मिड-डे मील खिलाती है,
साथ में फुड सेक्यूरिटी बिल भी लाती है,
पर जब गरीब की दिहाड़ी के बत्तीस रुपये में
आधा सेर प्याज़ मिल रहा है,
परिवार का पेट कैसे भरे ये अनसुलझा सवाल हो गया है.
इस देश का अब इतना अज़ीब-ओ-गरीब हाल हो गया है,

हाँ, अब सरकार जब मोटा अनाज रुपैये एक में देगी,
गेहूँ दो में और चावल तीन रुपैये में बेचेगी,
डेढ़लाख करोड़ रुपयों खातिर खास-ओ-आम को नोचेगी,
जब कमाके खानेवालों को टॅक्स का बोझ सताने लगेगा,
और गरीबों को गरीब होने का मज़ा आने लगेगा,
अर्थशास्त्री बतायेंगे की इंडिया का हर गरीब खुशहाल हो गया है,
इस देश का अब इतना अज़ीब-ओ-गरीब हाल हो गया है.

चुनाव आते ही पुराने वादों की याद आती है,
चाँद-तारों से सजे सपनों की बारात लाती है,
अगर जनता फेंकू को फेंक कर पप्पू को पास करती है,   
तो जिसके जवानों को भीख में मिली ज़िंदगी भी भाती नहीं थी,
उस देश का हर बच्चा गरीबी-भत्ता पाने लगेगा.
तब सारी दुनिया कहेगी हिंदुस्तान में ये कमाल हो गया है,
इस देश का अब इतना अज़ीब-ओ-गरीब हाल हो गया है.


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