Life is an interplay of dreams & deeds, imaginations & reality, hopes & despairs and so on. We all travel through the journey of our lives balancing between these dichotomous & anomalous situations racing at a break-neck speed. However, there is always a moment when flash backs seem to overpower the windscreen of our carts of life...............
ख़्वाब बस इक आशियाँ का
सोचा था कि अपना एक आशियाँ बना लूँगा,
सपनों की अपनी
महफ़िल सजा लूँगा;
ज़िंदगी का जुआ काँधे पर ले चलने लगा,
ज़माने की
रवायतों में मैं भी ढ़लने लगा;
ना जाने कब, कौन सा
मोड गलत मुड गया,
किस अनजाने सुर से
मेरा ताल जुड़ गया;
जो मंज़िल मिली
वो बड़ी बेरहम-बियाबान थी,
जो हमसफर मिले
वो अबूझे-अनजान थे;
यहाँ आकर लगता
है की रास्ता भूल गया हूँ,
जीत की वरमाला के फ़न्दे में झूल गया हूँ;
आगे बढ़ता हूँ
तो रंगोली नहीं रची है,
लौटने की भी सोचूँ तो उम्र नहीं बची है,
कहाँ पाऊँ वो
गंगा जिसमे नहा सकूँ,
अनजाने में
बाँधी ये गठरी बहा सकूँ.
रास्ते तो बहुत
हैं पर हमराह नहीं है,
जो साथ चल रहे
उन्हें परवाह नहीं है.
दिल चाहता है
कहीं छुप कर दो पल तो सो लें,
अपनी गफलतों की
दास्तान पर खुद ही रो लें.
लेकिन यहाँ तो
रुकने की गुंजाइश नहीं है,
ज़माने में
बदलने की ख्वाहिश नहीं है.
फिर भी कुछ ना
कुछ तो करना ही होगा,
आखिर बिन कुछ
किये भी तो मरना ही होगा.
आओ चेहरों से
दिखावट के मुखौटे हटा देते हैं,
घर की हर दीवार
पे आईना लगा देते हैं.
चलो अपने
ख्वाबों की दुनिया सजा लेते हैं,
महलों की क्या
जरूरत, एक कुटिया बना
लेते हैं.
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